Nag Panchami 2022: कब पड़ेगी नागपंचमी और किस मुहूर्त में पूजा करने पर मिलेगा नाग देवता का आशीर्वाद

Nag Panchami 2022 – इस लेख में नाग पंचमी महापर्व पर हार के रूप में पहने गए नाग देवता भगवान शिव से जुड़ी पूजा की सरल विधि, शुभ समय और महामंत्र का वर्णन किया गया है।

हिंदू धर्म में सांपों की पूजा करने का कानून है, जैसे सभी देवी-देवताओं की पूजा करने का कानून है। पौराणिक कथाओं के अनुसार नागधिराज वासुकी को इस पृथ्वी की नींव माना जाता है। इसी कारण शास्त्रों में नाग देवता की पूजा का न केवल विस्तार से वर्णन किया गया है, बल्कि एक शुभ दिन का भी चयन किया गया है। नाग पंचमी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। सुख और सौभाग्य की कामना के लिए महिलाएं इस दिन अपने भाइयों और परिवार के सदस्यों की रक्षा के लिए नाग देवता की पूजा करती हैं। प्रसिद्ध ज्योतिषी और कर्मकांड विशेषज्ञ आचार्य राम गणेश मिश्रा नाग पंचमी की पूजा का शुभ समय, पूजा विधि, धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व बताते हैं।

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इस शुभ मुहूर्त में मनाई जाती है नाग पंचमी

नागपंचमी 02 अगस्त 2022 को पूरे दिन और पूरी रात रहेगी। इस दिन, पंचमी तिथि 05:43 बजे शुरू होती है और अगले दिन 03 अगस्त 2022 को शाम 05:43 बजे समाप्त होती है। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने का सबसे अच्छा समय सुबह 05:43 बजे से 08:25 बजे के बीच है। नाग पंचमी पर करीब साढ़े तीन घंटे तक पूजन का शुभ मुहूर्त रहेगा। पंचांग इंगित करता है कि इस वर्ष नाग पंचमी पर शिव योग और उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र होगा, जो बहुत शुभ है।

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नाग पंचमी की पूजा विधि

नाग पंचमी के दिन व्रत और पूजा करते समय श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को एक बार ही भोजन करें और विधि-विधान से पूजा करें. स्नान और ध्यान करने के बाद नागपंचमी के दिन नियमानुसार नागपंचमी का व्रत करने का संकल्प लें। किसी चौकी पर नाग या नाग की मिट्टी या चांदी का चित्र लगाएं। उन्हें दूध और पानी से स्नान कराकर फूल, हल्दी, रोली और अक्षत से उनकी पूजा करें। फिर कच्चे दूध में चीनी मिलाकर नाग देवता को भोग के रूप में अर्पित करें और उनके मंत्र का जाप करें। अंतिम लेकिन कम से कम, नाग देवता की आरती करें और सुख, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करें।

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नाग पंचमी का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

हिंदू धर्म में नाग देवता की पूजा सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करने वाली मानी जाती है। जो लोग नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा करते हैं, उन्हें शत्रुओं का भय नहीं होता और अक्षय पुण्य प्राप्त होते हैं। नाग देवता की पूजा करने से कुंडली से जुड़ा कालसर्प दोष भी दूर हो जाता है, जहां व्यक्ति को जीवन में सर्पदंश का भय नहीं रहता।

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